जन्माष्टमी

कृष्ण तुम्हीं मीत हो,
कृष्ण तुम्हीं प्रीत हो,,,,
राधा का गीत हो,
जीवन का संगीत हो,,,,
मन का अंधकार हो,
ज्ञान का प्रकाश हो,,,,
आतुर मन की आस हो,
व्याकुल उर की साँस हो,,,,
माथे के चन्दन हो,
गोकुल के नंदन हो,,,,
तेरा ही वंदन हो,
तुमको अभिनन्दन हो,,,,
बुद्धि की चेतना हो,
मन की भावना हो,,,,
श्रृंगार का गहना हो,
तुम ही पाहुना हो,,,,
सकल गुण तुम्हीं हो,
निर्गुण तुम्हीं हो,,,,
आदि अन्त तुम्हीं हो,
अनंत भी तुम्हीं हो,,,,
कृष्ण तुम्हीं हार हो,
कृष्ण तुम्हीं जीत हो,,,,
कृष्ण तुम्हीं मीत हो,
कृष्ण तुम्हीं प्रीत हो,,,,

रचयिता
आनन्द मिश्रा, 
प्राथमिक विद्यालय तिगड़ा, 
विकास खण्ड-फखरपुर,
जनपद-बहराइच।

Comments

  1. क्या बात है , वाह आनंद भाई

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