कान्हा

यशोदा माँ से राधा है बोली
देख री माई कान्हा ठिठोली,
दाऊ संग फिरे बनावै टोली
हर क्षण सूझे इसको होली,
संग ग्वालों के जमुना किनारे
राह सखियों की तोड़े मटकी,
कान मरोड़ जब पूछै कुछ
कान्हा तेरा लेवे झपकी,
सिर लगाये वो पंख मोर
दौड़त घर-घर माखन चोर,
छीन खावे औरों के कौर
घुमक्कड़ ऐसा तेरा चितचोर,
पीछे भागे चोटी खींच
कान्हा मोय खूब सताये,
देख उसकी उद्दंडता
मन मेरा खूब झल्लाये,
संग सखा सब फोड़ी मटकी
कैसे अब भरूँ पानी,
तू ही कुछ कह दे मईया
मै तो वा की प्रेयसी दीवानी।।

रचयिता
योगेश कुमार,
सहायक अध्यापक,
नंगला काशी 
विकास खण्ड-धौलाना,
जनपद-हापुड़।

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