जो सजग हो गए हम

विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने बनाया
चीजों को बहुत आसान, 
जा पहुँचे अब नन्हे बच्चे
छूने को आसमान
पहुँचे वहाँ चाँद पर जब
तो देखी अपनी पृथ्वी
हरियाली का नाम नहीं था,
दिख रही थी बदरंग सी
अब समझ में आया इनको
हैं कितने ज़रूरी वृक्ष
अब तो जागें हम पृथ्वीवासी
निभाएँ अपना कर्तव्य
हरियाली से जोड़े नाता
पौधे लगाएँ खूब
पॉलिथीन मुक्त कर धरा
स्वच्छता को अपनाएँ
आओ करें संकल्प आज
हाँ, हर एक धरा का प्राणी
हरियाली है धरा पर लाना             
सतरंगी स्वच्छ है इसे बनाना
हरी-भरी, स्वच्छ होगी धरा
जो सजग हो गए हम
हाँ, सजग हो गए हम !!

रचयिता
दीपिका चौरसिया,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बलुवा,
विकास खण्ड-कैम्पियरगंज,
जनपद-गोरखपुर।

Comments

  1. बहुत सुन्दर ,प्रेरणादायी कविता ।

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