बेटियाँ पराई हैं

उठते-बैठते अक्सर
सुनने को मिल जाता है
बेटियाँ पराई होती हैं
शादी के बाद जब बेटी
ससुराल मे जाती है
वहाँ वह यह सुनकर
दंग रह जाती है कि
बहू तो पराये घर से आयी है
जब कभी ससुराल में
पति से नोक-झोंक हो जाती है
पति यह कहकर घर से
बाहर निकाल देता है कि
चली जाओ मेरे घर से
अब बेटी समझ नहीं पाती
कहाँ है उसका अपना घर                                                 
बेटी जाये तो जाये कहाँ                                               
वह जाती है अपने माँ-बाप के घर
माँ समझाते हुए कहती है
अपनी प्यारी बेटी से
शादी के बाद अब
ससुराल ही है तुम्हारा घर                                                 
पूरी जिदंगी बेटी रह जाती है
इसी उधेड़बुन में
कहाँ है उसका अपना घर
अन्ततः उसे समझ आ जाता है
कहीं नहीं है उसका अपना घर
अतः बेटियाँ पराई होती हैं
इसीलिए बेटी रो-रोकर कहती है
अच्छा करते हैं वो माँ-बाप
जो दुनिया मे आने से पहले ही
बेटी को कोख मे  ही मार डालते हैं।
       
रचयिता
अंजली  मौर्या 'अनू',
प्राथमिक विद्यालय बांसताली,
विकास खंड-लखीमपुर,
जनपद-लखीमपुर खीरी।

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