माँ शब्द स्वयं में शक्ति है

जिसके चरणों में जन्नत है
दिल में सागर सा प्यार भरा।
ममता की सच्ची मूरत जो
जिसका नाता सबसे गहरा।।

खुद आग में तपती रहती है
पर आँच नहीं आने देती।
सो जाती है खुद गीले में
आभास नहीं होने देती।।

पैरों का मिले प्रहार भले
सीने से लगाये रखती है।
दिन भर मशीन सा काम करे
वो जरा भी नहीं थकती है।।

सीखो सबक प्रकृति से अब
क्यों झेल रहे एकांतवास।
वो माँ कैसे रहे दूर भला
जो रखती सदा जिगर के पास।।

है व्यक्ति वही धनवान देखो
जिस घर में माँ की है छाया।
सच है माँ के आशीषों को
ईश्वर भी काट नहीं पाया।।

इसलिए यही निवेदन है
कुछ समय माँ के नाम करो।
माँ शब्द स्वयं में शक्ति है
सब देवी-माँ को प्रणाम करो।।

रचनाकार
अरुण कुमार यादव,
सहायक अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय बरसठी,,
विकास क्षेत्र-बरसठी,
जनपद-जौनपुर।
Mob--9598444853

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