समय
समय गतिमान है, चलता ही रहता है,
समय बलवान है, बढ़ता ही रहता है,
न रुकता न थमता निरन्तर चलता रहता है,
पीछे पलट कभी न आता, आगे बढ़ता रहता है,
नदिया की धारा के जैसे बहता रहता है,
झरने की निर्बाध गति सा निरन्तर चलता है,
पृथ्वी की गतिमान अवस्था जैसा रहता है,
अपनी धुन में जोगी सा रमता ही रहता है,
घड़ी की सुइयों को देखो तो बढ़ता दिखता है,
पड़ता नहीं दिखाई पर चलायमान रहता है,
आयु के जैसे ही हर पल बढ़ता रहता है,
जन्म से मरण, मरण के बाद भी चलता रहता है,
सूर्य के जैसे हरदम उदीप्तमान ही रहता है,
चन्दा के जैसा ही विचरण करता रहता है,
युगों- युगों से चलता आता बढ़ता रहता है,
भूत में चलता था, वर्तमान में चलता रहता है,
भविष्य में भी चलता रहेगा, बढ़ता रहता है,
अजर, अमर, अविराम, अटल बस चलता रहता है,
समय गतिमान है, चलता ही रहता है,
समय बलवान है, बढ़ता ही रहता है....
रचयिता
सुप्रिया सिंह,
इं0 प्र0 अ0,
प्राथमिक विद्यालय-बनियामऊ 1,
विकास क्षेत्र-मछरेहटा,
जनपद-सीतापुर।
समय बलवान है, बढ़ता ही रहता है,
न रुकता न थमता निरन्तर चलता रहता है,
पीछे पलट कभी न आता, आगे बढ़ता रहता है,
नदिया की धारा के जैसे बहता रहता है,
झरने की निर्बाध गति सा निरन्तर चलता है,
पृथ्वी की गतिमान अवस्था जैसा रहता है,
अपनी धुन में जोगी सा रमता ही रहता है,
घड़ी की सुइयों को देखो तो बढ़ता दिखता है,
पड़ता नहीं दिखाई पर चलायमान रहता है,
आयु के जैसे ही हर पल बढ़ता रहता है,
जन्म से मरण, मरण के बाद भी चलता रहता है,
सूर्य के जैसे हरदम उदीप्तमान ही रहता है,
चन्दा के जैसा ही विचरण करता रहता है,
युगों- युगों से चलता आता बढ़ता रहता है,
भूत में चलता था, वर्तमान में चलता रहता है,
भविष्य में भी चलता रहेगा, बढ़ता रहता है,
अजर, अमर, अविराम, अटल बस चलता रहता है,
समय गतिमान है, चलता ही रहता है,
समय बलवान है, बढ़ता ही रहता है....
रचयिता
सुप्रिया सिंह,
इं0 प्र0 अ0,
प्राथमिक विद्यालय-बनियामऊ 1,
विकास क्षेत्र-मछरेहटा,
जनपद-सीतापुर।

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