सबसे अच्छा मेरा गाँव
सबसे अच्छा मेरा गाँव,
प्यारा-प्यारा न्यारा गाँव।
मेरे गाँव की बात निराली,
चारों ओर फैली हरियाली।
खेतों में करते काम किसान,
पैदा होता है जहाँ अनाज।
किसान के बच्चे स्कूल जाते,
पढ़ने में मन खूब लगाते।
पढ़कर आते करते काम,
चाहे सुबह हो चाहे शाम।
पढ़ लिखकर हम काम करेंगे,
अपने गाँव का नाम करेंगे।
पढ़ लिखकर अधिकारी बनते,
देश की वह सच्ची सेवा करते।
सबसे अच्छा मेरा गाँव,
प्यारा-प्यारा न्यारा गाँव।
कुआँ से वह हैं पानी पीते,
गाय, भैंस को जीवन देते।
वह बचपन, सावन के झूले,
हम सब उसको कभी न भूलें।
वह चिड़ियों का चहकना,
वह फूलों का महकना,
वह खेतों की हरियाली,
कोयल बैठी डाली-डाली।
खींच लाता है शहर से गाँव,
अपने बड़ों का आशीर्वाद,
लस्सी और गुड़ के साथ,
बाजरे की रोटी का स्वाद।
बनाकर मिट्टी के खिलौने,
खेलते पेड़ों की छाँव में।
बचपन मेरा महक रहा है,
आज भी मेरे गाँव में..।
सबसे अच्छा मेरा गाँव,
प्यारा-प्यारा न्यारा गाँव।
रचयिता
अजय कुमार वर्मा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भैरवां प्रथम,
शिक्षा क्षेत्र-हसवा,
जनपद-फतेहपुर।
प्यारा-प्यारा न्यारा गाँव।
मेरे गाँव की बात निराली,
चारों ओर फैली हरियाली।
खेतों में करते काम किसान,
पैदा होता है जहाँ अनाज।
किसान के बच्चे स्कूल जाते,
पढ़ने में मन खूब लगाते।
पढ़कर आते करते काम,
चाहे सुबह हो चाहे शाम।
पढ़ लिखकर हम काम करेंगे,
अपने गाँव का नाम करेंगे।
पढ़ लिखकर अधिकारी बनते,
देश की वह सच्ची सेवा करते।
सबसे अच्छा मेरा गाँव,
प्यारा-प्यारा न्यारा गाँव।
कुआँ से वह हैं पानी पीते,
गाय, भैंस को जीवन देते।
वह बचपन, सावन के झूले,
हम सब उसको कभी न भूलें।
वह चिड़ियों का चहकना,
वह फूलों का महकना,
वह खेतों की हरियाली,
कोयल बैठी डाली-डाली।
खींच लाता है शहर से गाँव,
अपने बड़ों का आशीर्वाद,
लस्सी और गुड़ के साथ,
बाजरे की रोटी का स्वाद।
बनाकर मिट्टी के खिलौने,
खेलते पेड़ों की छाँव में।
बचपन मेरा महक रहा है,
आज भी मेरे गाँव में..।
सबसे अच्छा मेरा गाँव,
प्यारा-प्यारा न्यारा गाँव।
रचयिता
अजय कुमार वर्मा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भैरवां प्रथम,
शिक्षा क्षेत्र-हसवा,
जनपद-फतेहपुर।

👌👌
ReplyDeleteThanks mam
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