मुझको भी पढ़ना है

मत भेजो काम पर मुझे,
मुझको भी पढ़ना है।
रो-रो कर विनती करूँ,
मुझे आगे बढ़ना है।

अनपढ़ रह जाऊँगा,
 मैं क्या करूँगा जग में।
कैसे पहचानूँगा,
मैं पराये और अपने।
दोषी तुम होगे फिर,
मुझे और ना कहना है।

यह मेरा बचपन है,
इसको ना छीनो तुम।
मेरे भी सपने हैं,
 इनको भी जानो तुम।
शिक्षा पाकर जग में,
 नाम रोशन करना है।

मत भेजो काम पर मुझे,
मुझको भी पढ़ना है।
रो रो कर विनती करूँ,
मुझे आगे बढ़ना है।

रचयिता
प्रियदर्शिनी तिवारी,
प्रधानाध्यापिका,
संविलियन विद्यालय कुआंडीह,
विकास खण्ड-मंझनपुर,
जनपद-कौशाम्बी।

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