बाल-श्रम मिटाना है
तर्ज-हमने घर छोड़ा है, रस्मों को तोड़ा है-फिल्म-"दिल"
हमने यह ठाना है, बाल-श्रम मिटाना है।
स्कूल इन्हें लाएँगे, एक नया सपना दिखाएँगे।-(2)
बचपन तेरा छीना जाए,
रास कभी भी ना आए।
कहीं मजबूरी, अभावों में तेरा,
भावी जीवन छिन न जाए।
स्कूल इन्हें लाएँगे,
भावी जीवन बचाएँगे।(2)
हमने यह ठाना है, बाल-श्रम मिटाना है।
नन्हें कर से श्रम के, औजार हटाएँगे,
इन नन्हें हाथों में, कापी कलम दिलाएँगे।
स्कूल इन्हें लाएँगे, भावी जीवन बचाएँगे।
हमने यह ठाना है, बाल-श्रम मिटाना है।
बाल-मंदिर इन्हें लाएँगे,
जीवन का पाठ पढ़ाएँगे।
बचपन में ही बुढ़ापा आए,
ए बात समझ ना आए।
बचपन की मुस्कान वो,
इनकी छिन न जाए।
हम तेरे चेहरे की,
मासूमियत लौटाएँगे।
स्कूल इन्हें लाएँगे,
चेहरों पे पुष्प खिलाएँगे।
जै हिंद जै हिंद के बाल
रचयिता
विजय मेहंदी,
सहायक अध्यापक,
KPS(E.M.School) शुदनीपुर,
विकास खण्ड-मड़ियाहूं,
जनपद-जौनपुर।
हमने यह ठाना है, बाल-श्रम मिटाना है।
स्कूल इन्हें लाएँगे, एक नया सपना दिखाएँगे।-(2)
बचपन तेरा छीना जाए,
रास कभी भी ना आए।
कहीं मजबूरी, अभावों में तेरा,
भावी जीवन छिन न जाए।
स्कूल इन्हें लाएँगे,
भावी जीवन बचाएँगे।(2)
हमने यह ठाना है, बाल-श्रम मिटाना है।
नन्हें कर से श्रम के, औजार हटाएँगे,
इन नन्हें हाथों में, कापी कलम दिलाएँगे।
स्कूल इन्हें लाएँगे, भावी जीवन बचाएँगे।
हमने यह ठाना है, बाल-श्रम मिटाना है।
बाल-मंदिर इन्हें लाएँगे,
जीवन का पाठ पढ़ाएँगे।
बचपन में ही बुढ़ापा आए,
ए बात समझ ना आए।
बचपन की मुस्कान वो,
इनकी छिन न जाए।
हम तेरे चेहरे की,
मासूमियत लौटाएँगे।
स्कूल इन्हें लाएँगे,
चेहरों पे पुष्प खिलाएँगे।
जै हिंद जै हिंद के बाल
रचयिता
विजय मेहंदी,
सहायक अध्यापक,
KPS(E.M.School) शुदनीपुर,
विकास खण्ड-मड़ियाहूं,
जनपद-जौनपुर।

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