नारी है सबसे न्यारी

नारी शक्ति के अनेक हैं रूप,
जिसमें सिमटा जीवन स्वरूप।
कभी बेटी, कभी बहन कहलाए,
कभी भार्यारूपी ढाल बन जाए।

इनसे हटकर एक अलग है नाम,
जिसने जीता ये सारा संसार।
इनके बिना न हम तुम होते,
बिन इनके अपनी पहचान को खोते।

परिवर्तन देखो है कैसा आया,
कैसी है इस संसार की माया।
जहाँ घर की लक्ष्मी होती थी माता,
लक्ष्मी कमाने से जुड़ा उसका नाता।

घर और दफ्तर दोनों सँभाला,
हर क्षेत्र में खुद को साबित कर डाला।
प्रतिस्पर्धा हो या फिर हो कोई शाला,
नारी है शक्ति स्वरूपा, ये बतला है डाला।

रचयिता
आस्था शर्मा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय इस्लामनगर,
विकास खण्ड व जनपद - मुरादाबाद।

Comments

  1. नारी शक्ति बेजोड़ थी और हमेशा रहेगी।

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