नर्स
जो निभाती है हर वक़्त अपना फर्ज,
दूर करती है देखभाल से हमारे मर्ज।
जिनको देखकर मरीजों के चेहरे पर होता है हर्ष,
वह प्यारी -सी, भोली -सी होती हैं नर्स।
वो दिल की साफ और खूबसूरत होती हैं,
जो किसी से भी नहीं भेदभाव करती हैं।
नहीं पूछती जाति -धर्म और नहीं देखती हैं ऊँच -नीच,
एक दीवार -सी खड़ी रहती हैं मरीज और रोग के बीच।
ऐ खुदा! मैं करता हूँ बस तुमसे एक ही अर्ज,
इन योद्धाओं से रखना सदा दूर हर मर्ज।
रचयिता
शिराज़ अहमद,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय ददरा,
विकास खण्ड-मड़ियाहूं,
जनपद-जौनपुर।
दूर करती है देखभाल से हमारे मर्ज।
जिनको देखकर मरीजों के चेहरे पर होता है हर्ष,
वह प्यारी -सी, भोली -सी होती हैं नर्स।
वो दिल की साफ और खूबसूरत होती हैं,
जो किसी से भी नहीं भेदभाव करती हैं।
नहीं पूछती जाति -धर्म और नहीं देखती हैं ऊँच -नीच,
एक दीवार -सी खड़ी रहती हैं मरीज और रोग के बीच।
ऐ खुदा! मैं करता हूँ बस तुमसे एक ही अर्ज,
इन योद्धाओं से रखना सदा दूर हर मर्ज।
रचयिता
शिराज़ अहमद,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय ददरा,
विकास खण्ड-मड़ियाहूं,
जनपद-जौनपुर।

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