माँ
जब से छूटा है साथ माँ तेरा
गुम अंधेरों में हो गई हूँ मैं
कोई, मौसम हो या कोई त्योहार
कुछ भी अच्छा हमें नहीं लगता
यूँ तो सब कुछ है पर कमी सी है
बिन तेरे ज़िंदगी अधूरी है
इतनी जल्दी हमें तू छोड़ गई
बिन तेरे माँ बहुत उदास हैं हम
कौन अब लोरियाँ सुनाएगा
नाज़ नख़रे मेरे उठाएगा
यूँ तो रिश्ते बहुत हैं दुनिया में
माँ तेरे जैसा कोई और नहीं
मेरे हर दर्द की दवा तू थी
तेरे आँचल की ठंडी छाँव में,
मेरे दिल को सुकून मिलता था
आज फिर मुझको दर्द होता है
आज फिर मेरी नींद रूठी है
मेरी माँ तू नहीं है दुनिया में
लेके जाऊँ कहाँ मैं दर्द अपना
लेके जाऊँ कहाँ मैं दर्द अपना
रचयिता
नुसरत जहाँ,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय टेकुआपीती,
विकास खण्ड-सहजनवा,
जनपद-गोरखपुर।
गुम अंधेरों में हो गई हूँ मैं
कोई, मौसम हो या कोई त्योहार
कुछ भी अच्छा हमें नहीं लगता
यूँ तो सब कुछ है पर कमी सी है
बिन तेरे ज़िंदगी अधूरी है
इतनी जल्दी हमें तू छोड़ गई
बिन तेरे माँ बहुत उदास हैं हम
कौन अब लोरियाँ सुनाएगा
नाज़ नख़रे मेरे उठाएगा
यूँ तो रिश्ते बहुत हैं दुनिया में
माँ तेरे जैसा कोई और नहीं
मेरे हर दर्द की दवा तू थी
तेरे आँचल की ठंडी छाँव में,
मेरे दिल को सुकून मिलता था
आज फिर मुझको दर्द होता है
आज फिर मेरी नींद रूठी है
मेरी माँ तू नहीं है दुनिया में
लेके जाऊँ कहाँ मैं दर्द अपना
लेके जाऊँ कहाँ मैं दर्द अपना
रचयिता
नुसरत जहाँ,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय टेकुआपीती,
विकास खण्ड-सहजनवा,
जनपद-गोरखपुर।

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