मंजिल अभी दूर है

दूर किनारा है अभी बहुत दूर तक जाना है,
ये जिंदगी का सफर नहीं आसान कठिन रास्ता है।

मंजिल ढूँढने निकले थे, रास्ते भटक गये,
चलते-चलते यूँ ही अफसाने बदल गये।
मंजिल तो न मिली अरमान बदल गये,
अरमानों को फिर सजाकर आगे बढ़ गये।।
दूर किनारा है अभी बहुत दूर...................

अब खड़े होना है फिर से,
नई राहें बनाना है फिर से।
राहें फिर मिलेंगी खुद से,
जिंदगी का दस्तूर जो निभाना है।।
दूर किनारा है अभी बहुत दूर..............

जिंदगी गम तो बहुत देती है,
सँभलना भी  वही सिखाती है।
जिंदगी संघर्ष की कहानी है,
संघर्ष तो करते ही जाना है।।
दूर किनारा है अभी बहुत दूर............

रचयिता
हेमलता यादव,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय बेंती सादात,
शिक्षा क्षेत्र-भिटौरा,
जनपद-फतेहपुर।

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