महाराणा प्रताप
जो शूरवीर राणा सांगा का वंशी है,
जिसने मुगलों को छकाया है।
आजादी का उदघोष कर,
वह राणा प्रताप यशगान पाया है।
हल्दी घाटी के युद्धों से,
दुश्मनों का दिल दहलाया है।
जयचंदों के छल घातों से ही,
घास की रोटी खाया है।
अकबर के यश पर आघात कर,
सब तुर्कों को घबराया है।
घिर चहुँओर दुश्मनों से महाराणा ने,
तलवार ले चेतक संग कोहराम मचाया है।
अत्यंत विकट परिस्थितियों में,
जिसने हार नहीं संकट को हटाया है।
व्याकुल पक्षियों ने भर नभ में उड़ान,
कर क्रन्दन आसमान को दहलाया है।
दुश्मनों के दाँत खट्टे कर,
वह महावीर कहलाया है।
घायल चेतक संग प्राण त्याग,
हिन्दुस्तान के वीरों का वीर कहलाया है।
रचयिता
दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल,
प्रधानाध्यापक,
संविलियत विद्यालय सोनवल,
विकास खण्ड-लक्ष्मीपुर,
जनपद-महराजगंज।
जिसने मुगलों को छकाया है।
आजादी का उदघोष कर,
वह राणा प्रताप यशगान पाया है।
हल्दी घाटी के युद्धों से,
दुश्मनों का दिल दहलाया है।
जयचंदों के छल घातों से ही,
घास की रोटी खाया है।
अकबर के यश पर आघात कर,
सब तुर्कों को घबराया है।
घिर चहुँओर दुश्मनों से महाराणा ने,
तलवार ले चेतक संग कोहराम मचाया है।
अत्यंत विकट परिस्थितियों में,
जिसने हार नहीं संकट को हटाया है।
व्याकुल पक्षियों ने भर नभ में उड़ान,
कर क्रन्दन आसमान को दहलाया है।
दुश्मनों के दाँत खट्टे कर,
वह महावीर कहलाया है।
घायल चेतक संग प्राण त्याग,
हिन्दुस्तान के वीरों का वीर कहलाया है।
रचयिता
दयानन्द त्रिपाठी व्याकुल,
प्रधानाध्यापक,
संविलियत विद्यालय सोनवल,
विकास खण्ड-लक्ष्मीपुर,
जनपद-महराजगंज।

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