बुद्ध पूर्णिमा
है नमन तुम्हें है नमन बुद्ध!
जय-जय धर्मात्मन् महाशुद्ध।
ये विश्व सदा से दुख पूर्ण,
दुखों की मूल कामना है।
कामना अगर हम काट सके,
होती परिपूर्ण साधना है।
कामना न जब तक भागेगी,
तब तलक न मन होगा विशुद्ध।
है नमन तुम्हें है नमन बुद्ध।
तुमने अद्भुत संज्ञान लिया,
जग-जीवन को वरदान दिया।
भूले-भटके सर राही को,
अपनी करूणा का दान दिया।
जग ने तुमको अवतार कहा,
तुमने दुख के बन्धन काटे,
पाखण्डवाद के तुम विरुद्ध।
है नमन तुम्हें है नमन बुद्ध।
जय-जय धर्मात्मन् महाशुद्ध।
ये विश्व सदा से दुख पूर्ण,
दुखों की मूल कामना है।
कामना अगर हम काट सके,
होती परिपूर्ण साधना है।
कामना न जब तक भागेगी,
तब तलक न मन होगा विशुद्ध।
है नमन तुम्हें है नमन बुद्ध।
तुमने अद्भुत संज्ञान लिया,
जग-जीवन को वरदान दिया।
भूले-भटके सर राही को,
अपनी करूणा का दान दिया।
जग ने तुमको अवतार कहा,
तुमने दुख के बन्धन काटे,
पाखण्डवाद के तुम विरुद्ध।
है नमन तुम्हें है नमन बुद्ध।
रचयिता
डॉ0 प्रवीणा दीक्षित,
हिन्दी शिक्षिका,
के.जी.बी.वी. नगर क्षेत्र,

Comments
Post a Comment