हम बच्चे हैं

हम बच्चे हैं, हमको अभी पढ़ने दो
उम्मीदों के पंख लगाके उड़ने दो।

क, ख, ग, घ बन जाए संसार हमारा
A, B, C से बदलें अपना जीवन सारा।
हमको पुस्तकों की ओर मुड़ने दो।
उम्मीदों के पंख लगाके उड़ने दो।।

हम ही कलाम और बोस, रमन कहलाएँगे,
हम सचिन, सिंधु, मैरी बनके दिखलाएँगे।
हम नदिया की धार, हमें मत रुकने दो।
उम्मीदों के पंख लगाके उड़ने दो।

रचयिता
अविनाश कुमार श्रीवास्तव,
इं० प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय इटौरा,
विकास खण्ड-बाँसगाँव,
जनपद-गोरखपुर।

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