माँ
यद्यपि स्वर्णमयी
लंका लक्ष्मन में न रोचते।
जननी जन्मभूमिश्च
स्वर्गदपि गरीयसि।।
अर्थात - रामायण का यह प्रसंग उस समय
का है जब सीता जी सोने की लंका में रहकर
भी उसे तुच्छ समझते हुए कहती हैं कि यद्यपि
लंका सोने की थी लेकिन, मुझे वो कभी अच्छी न
लगी लक्ष्मन, क्योकि जननी (माँ) और जन्मभूमि दोनों ही स्वर्ग से भी सुंदर
और अच्छी होती हैं। वास्तव में देखा जाए
तो माँ अपने आपमें इतना विराट और महान शब्द है जिसको शब्दों में बाँधना बहुत ही कठिन
है। हम माँ के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। माँ की महानता का अंदाजा हम
इसी बात से लगा सकते हैं कि भगवान का नाम लेना भले ही भूल जाए लेकिन कभी भी सुख हो
या दुख मेरे मुख से माँ का ही नाम निकलता है। माँ वह होती है जो हमें जन्म देने के साथ ही साथ
हमारा पालन - पोषण भी करती है। वह माँ ही
होती है जो दुनिया भर के कष्ट सहन कर अपनी संतान को सारा सुख देना चाहती है, वह माँ ही
होती है जो खुद भूखे रहकर अपने बच्चों को खाना खिलाना कभी नहीं भूलती।
हमारा गौरवशाली इतिहास ऐसे बहुत सारी
घटनाओं से भरा पड़ा है जिसमें माताओं ने अपनी संतानों के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर
कर दिया, लेकिन अपनी संतानों ओर कोई आँच न आने दी।
माँ की ममता धरती जैसा विशाल, आकाश जैसा
अनंत एवम सागर जैसा अथाह गहराई लिए है जिसे कभी मापा और तौला नहीं जा सकता।
हमारे आदर्श जीवन के निर्माण में माँ की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। हम बचपन से ही माँ के द्वारा सत्य, सदाचार एवम संस्कार जैसी महत्वपूर्ण शिक्षाएँ प्राप्त करते हैं या इसे हम दूसरों शब्दों में कह सकते हैं कि हमारा व्यक्तित्व, आचरण व्यवहार एवम हमारे संस्कार हमारे माँ की ही देन होती है, वही हमारी प्रथम गुरु एवम पालक होती है। जब भी हम जीवन में अपनी राह भटक जाते हैं तो हमारी माँ सदैव हमें सन्मार्ग पर लाने के लिए हमारा मार्ग प्रशस्त करती है।
निष्कर्षतः हम कह सकते हैं कि हमारे
जीवन में यदि कोई सबसे अधिक महत्व रखता है तो निःसन्देह वह मेरी माँ है क्योंकि
माँ के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यही कारण है कि माँ को पृथ्वी पर ईर का रूप माना
जाता है। अतः हमारा नैतिक दायित्व है कि
हम अपने आचरण, व्यवहार एवम कृतित्व से सदैव माँ को खुश रखें। इस
संदर्भ में किसी ने सत्य ही कहा है कि -
धरती पर ईश्वर हर जगह मौजूद नहीं रह
सकता, इसीलिए उसने माँ को बनाया।
मातृ दिवस पर अपनी परम् पूज्यनीया
माँ एवम इस ब्रह्मांड की सभी माताओं को समर्पित।
लेखिका
डॉ0 उषा सिंह,
प्रधानाध्यापिका,
इंग्लिश मीडियम प्राइमरी स्कूल चकताली,
शिक्षा क्षेत्र-सिरकोनी,
जनपद-जौनपुर।
जनपद-जौनपुर।

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