हमारा संयुक्त परिवार

जहाँ घर के बड़े बुजुर्गों के साए में रहकर.......
    हम सबका जीवन निखरता था....

जहाँ पूरा परिवार घर के आँगन में बैठ.....
     हँसी-ठिठोली से पूरा आँगन महका देता था....

जहाँ दादी की वो प्यारी गोदी में....
     उनकी थपकी भर से ही सुकून की नींद आ जाती थी....

जहाँ मैं - मैं से ज्यादा खुशी.....
     हम बनकर आती थी....

जहाँ दुःख एक का होता था......
    लेकिन परेशान पूरा परिवार होता था....

जहाँ बच्चे सबके साथ रहकर......
     सबका आदर सम्मान करते थे.....

रचयिता
शिप्रा सिंह,
सहायक अध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय रूसिया, 
विकास खण्ड-अमौली,
जनपद-फतेहपुर।

Comments

Total Pageviews