माँ

अनूठी, अलौकिक, अद्भुत ईश्वर की कृति है माँ।
सृष्टि, सृजन कर सुरम्य बनाती है माँ।
नवजीवन देकर स्वयं पुनर्जन्म पाती है माँ।
असीम त्याग, अथाह ममता की मूर्ति  है माँ।

जननी, जन्मदात्री, माता, अम्बा, माँ।
अगणित रूप में भी नहीं समाती है माँ।
सुख-चैन त्याग कर ममता लुटाती है माँ।
न्योछावर कर सारे सुख फिर भी खुश रहती है माँ।

नवजात शिशु की आवाज स्वयं बन जाती है माँ।
भूखी रहकर बच्चे को खिलाती है माँ।
कदम - कदम पर जीवन भर चलना सिखाती है माँ।
कभी गुरु, कभी मित्र बनकर अपनी छाया देती है माँ।

ऋणी प्रकृति का हर जीव सब में समायी है माँ।
पूजनीय, वन्दनीय, प्रकृति का वरदान है माँ।

रचयिता
प्रतिमा उमराव,
सहायक शिक्षिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय अमौली,
विकास खण्ड-अमौली,
जनपद-फतेहपुर।

Comments

Post a Comment

Total Pageviews