माँ

ईश्वर को न ढूँढो जग में,
ईश्वर का ही रूप है 'माँ',
'माँ' है जीवन की अनमोल पूँजी,
न होगी मूरत इनके जैसे कोई दूजी.....

'माँ' की गोद का सानिध्य है ऐसा,
फूलों में परागों के सुगन्ध के जैसा...

स्नेहिल स्पर्श ने तुम्हारी सँवारा बचपन हमारा है,
अपना सुख दुख 'माँ' तुमने हम पर वारा है....

मैं जो मुरझाया तुम शीतल जल बन गयीं
मै जब लड़खड़ाया, तुम मेरा सहारा बनीं,
मैं कष्टों में रहा, तुम अनगिनत रातें जगीं,

मेरी मुस्कान से तुम्हारे अधर मुस्काएँ,
मेरे रोने से तुम्हारी आँखें छलक जाएँ,
मेरे हँसने रोने से तुम्हारे शाम सवेरे हैं,
कहती है 'माँ', तेरे सारे सपने अब मेरे हैं...

शब्दों में जो पिरोया न जा सके,
तुम संसार में ऐसी किरदार हो....
ईश्वर के रूप में इस धरती पर
'माँ' तुम जीवन की रचनाकार हो....

रचयिता
फरज़ाना बानो,
सहायक अध्यापक विज्ञान,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय नेवादा,
विकास खण्ड-शाहगंज,
जनपद-जौनपुर।

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