विश्व धरोहर हैं ये बालक
विश्व धरोहर हैं ये बालक,
इनका ताज बुलंद करो।
शिक्षित करना हर बच्चे को,
धर्म यही स्वच्छंद करो।।
राष्ट्र नींव हैं ये कहलाते,
श्रम इनसे फिर क्यों करवाते,
पथ-भ्रष्ट इन्हें जो करते हैं,
सबक़ उन्हें क्यों नहीं सिखाते,
लोलुपता जिनमें हो ऐसी,
पकड़ो उनको बन्द करो।
शिक्षित करना हर बच्चे को,
धर्म यही स्वच्छंद करो।।
गांधी यही क़लाम यही हैं,
यही कृष्ण बलराम यही हैं,
अंतः चक्षु से जानो इनको,
दिनकर जैसा नाम यही हैं,
सम्पूर्ण जगत में यश फैले,
इनको विवेकानंद करो।
शिक्षित करना हर बच्चे को,
धर्म यही स्वच्छंद करो।।
ढूंढ़नी हैं कुछ नभ कल्पना,
कुछ शांत अविचलित टेरेसा,
शिक्षक ही देता है आखिर,
इंदिरा जैसी निर्णायिका,
लय सुर ताल बनाओ इनकी,
एक व्यवस्थित छंद करो।
शिक्षित करना हर बच्चे को,
धर्म यही स्वच्छंद करो।।
श्रम कार्य नहीं करवाना है,
शिक्षा का अलख जलाना है,
शपथ उठाते हैं भारत को,
फिर जग सिरमौर बनाना है,
शिक्षा की "ममता" से इनके,
जीवन को निर्द्वंद करो।
शिक्षित करना हर बच्चे को,
धर्म यही स्वच्छंद करो।।
रचयिता
ममता शर्मा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय खजुरियाना,
विकास खण्ड-जैथरा,
जनपद-एटा।
इनका ताज बुलंद करो।
शिक्षित करना हर बच्चे को,
धर्म यही स्वच्छंद करो।।
राष्ट्र नींव हैं ये कहलाते,
श्रम इनसे फिर क्यों करवाते,
पथ-भ्रष्ट इन्हें जो करते हैं,
सबक़ उन्हें क्यों नहीं सिखाते,
लोलुपता जिनमें हो ऐसी,
पकड़ो उनको बन्द करो।
शिक्षित करना हर बच्चे को,
धर्म यही स्वच्छंद करो।।
गांधी यही क़लाम यही हैं,
यही कृष्ण बलराम यही हैं,
अंतः चक्षु से जानो इनको,
दिनकर जैसा नाम यही हैं,
सम्पूर्ण जगत में यश फैले,
इनको विवेकानंद करो।
शिक्षित करना हर बच्चे को,
धर्म यही स्वच्छंद करो।।
ढूंढ़नी हैं कुछ नभ कल्पना,
कुछ शांत अविचलित टेरेसा,
शिक्षक ही देता है आखिर,
इंदिरा जैसी निर्णायिका,
लय सुर ताल बनाओ इनकी,
एक व्यवस्थित छंद करो।
शिक्षित करना हर बच्चे को,
धर्म यही स्वच्छंद करो।।
श्रम कार्य नहीं करवाना है,
शिक्षा का अलख जलाना है,
शपथ उठाते हैं भारत को,
फिर जग सिरमौर बनाना है,
शिक्षा की "ममता" से इनके,
जीवन को निर्द्वंद करो।
शिक्षित करना हर बच्चे को,
धर्म यही स्वच्छंद करो।।
रचयिता
ममता शर्मा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय खजुरियाना,
विकास खण्ड-जैथरा,
जनपद-एटा।

Behtareen pratibha...bachcho ke lie mashaal roopi kavita....sadar
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