बीत जाए यह दुःखमय रजनी
इस करुणा का करूण क्रंदन,
हो जाएगा अन्त मन्द - मन्द।
दुःख बीतेगा सुख आएगा,
बीतेगी तमस रजनी चंचल
पुलकित मुखलित विकसित होकर।
नवल प्रभात उज्ज्वल बन फिर आएगा
घर - घर में मधुर - मधुर मुस्कान होगी
सन्नाटा जाएगा
प्रफुल्लित सबके मन होंगे।
बीतेगी दुखमय रजनी,
आएगा सुखद सवेरा
दुख बीतेगा, सुख आएगा
बीतेगी तमस रजनी चंचल।।
सब नयनों का अश्रु नीर,
मन्द -मन्द गति से ही थमेगा,
जब होंगे सब धीर-वीर - गम्भीर,
विहसति आएगी सुखमय रजनी।
दुखमय रजनी जब गुजरेगी
सावधानी ही बचाव है
असावधानी हार होगी
संयम और संकल्प रहेगा,
दुख बीतेगा सुख आएगा
बीतेगी तमस रजनी चंचल।
हर घर मुस्काएगा,
सन्नाटा छँट जाएगा।
प्रफुलित सब मन होंगे,
सुख बिखराती रजनी होगी।
जीवन लौटेगा, बहार आएगी
पतझड़ बीत, मधुऋतु आएगी,
पुष्प खिल, बहार आएगी।
आशा प्रत्याशा का युग आएगा,
विपदा जाएगी, सुख आएगा।।
बीतेगी यह दुखमय रजनी
हो जाएगा अन्त मन्द - मन्द।
दुःख बीतेगा सुख आएगा,
बीतेगी तमस रजनी चंचल
पुलकित मुखलित विकसित होकर।
नवल प्रभात उज्ज्वल बन फिर आएगा
घर - घर में मधुर - मधुर मुस्कान होगी
सन्नाटा जाएगा
प्रफुल्लित सबके मन होंगे।
बीतेगी दुखमय रजनी,
आएगा सुखद सवेरा
दुख बीतेगा, सुख आएगा
बीतेगी तमस रजनी चंचल।।
सब नयनों का अश्रु नीर,
मन्द -मन्द गति से ही थमेगा,
जब होंगे सब धीर-वीर - गम्भीर,
विहसति आएगी सुखमय रजनी।
दुखमय रजनी जब गुजरेगी
सावधानी ही बचाव है
असावधानी हार होगी
संयम और संकल्प रहेगा,
दुख बीतेगा सुख आएगा
बीतेगी तमस रजनी चंचल।
हर घर मुस्काएगा,
सन्नाटा छँट जाएगा।
प्रफुलित सब मन होंगे,
सुख बिखराती रजनी होगी।
जीवन लौटेगा, बहार आएगी
पतझड़ बीत, मधुऋतु आएगी,
पुष्प खिल, बहार आएगी।
आशा प्रत्याशा का युग आएगा,
विपदा जाएगी, सुख आएगा।।
बीतेगी यह दुखमय रजनी
रचयिता
माधव सिंह नेगी,
प्रधानाध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय जैली,
विकास खण्ड-जखौली,
जनपद-रुद्रप्रयाग,

मिशन शिक्षण संवाद विचार शक्ति में कविता को स्थान देने के लिए मिशन शिक्षण संवाद का हार्दिक धन्यवाद 🙏
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