पुरानी यादों में

आज फिर से उसी राह पर आ गए हैं,
बाहर के खाने की जगह,
माँ के हाथ का खाना खा रहे हैं,
फोन पर घण्टों बैठने की जगह,
परिवार के साथ कुछ वक़्त गुजार रहे हैं
आज फिरसे उसी राह पर आ गए हैं,
पिता की डाँट में मज़ा आ रहा है,
तो भाई के साथ लड़ने में मज़ा आ रहा है,
बहन की टाँग तो पहले भी खींचते थे,
पर आज उसको हँसाने का वक़्त आ गया है,
आज फिरसे उसी राह पर आ गए हैं,
समुन्दर के पानी में खुद का चेहरा साफ दिखने लगा है,
तो आसमान में तारे टिमटिमाने लगे हैं,                                 चंदामामा से इस तरह बात हो रही है,
कि चाँदनी रात हर शाम हो रही है,
आज फिरसे उसी राह पर आ गए हैं,
घर के  कोने पर बैठने की जगह,
घर वालों के साथ खेल रहे हैं,
पुरानी अलमारी खोलते-खोलते,
अपनी पुरानी यादों में खो गए हैं,
आज फ़िर उसी राह पर आ गए हैं हम।

रचियता 
कंचन सक्सेना,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिसाहुली,
विकास खण्ड-इगलास,
जनपद-अलीगढ़।

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