माँ
माँ तेरी ममता तो कुछ ऐसी है,
तपती धूप में ठंडी छाँव जैसी है।
जब आई थी मैं इस दुनिया में
पाया सबसे पहले जो ठिकाना
माँ तेरा मधुर आँचल ही बना
मेरा सबसे पहला आशियाना।
दिन रात तेरी ही गोदी में
हरदम मैं खेला करती थी
अपनी उन नन्ही आँखों से
तुझको ही देखा करती थी।
माँ तू कितनी प्यारी है
मेरी तो दुनिया सारी है।
तेरी ही उँगली पकड़कर
मैंने तो चलना सीखा था।
माँ तू तो ज्ञान की देवी है
बचपन अज्ञान सरीखा था।
जब बनी तू मेरी प्रथम गुरु
दुनिया से कराया तूने ही रूबरू
मैं तो नासमझ नादान सी थी
माँ तू कितनी समझदार थी।
मेरी हर गलती को माफ़ किया
हर मुश्किल में मेरा साथ दिया।
यह जीवन तो है बहती नदिया
इसकी तेज धारा में तू नाव जैसी है।
माँ तेरी ममता तो कुछ ऐसी है।
तपती धूप में ठंडी छाँव जैसी है।
रचयिता
रश्मि यादव,
प्रधान शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय देवगनमऊ,
विकास खण्ड-सफीपुर,
जनपद-उन्नाव।
तपती धूप में ठंडी छाँव जैसी है।
जब आई थी मैं इस दुनिया में
पाया सबसे पहले जो ठिकाना
माँ तेरा मधुर आँचल ही बना
मेरा सबसे पहला आशियाना।
दिन रात तेरी ही गोदी में
हरदम मैं खेला करती थी
अपनी उन नन्ही आँखों से
तुझको ही देखा करती थी।
माँ तू कितनी प्यारी है
मेरी तो दुनिया सारी है।
तेरी ही उँगली पकड़कर
मैंने तो चलना सीखा था।
माँ तू तो ज्ञान की देवी है
बचपन अज्ञान सरीखा था।
जब बनी तू मेरी प्रथम गुरु
दुनिया से कराया तूने ही रूबरू
मैं तो नासमझ नादान सी थी
माँ तू कितनी समझदार थी।
मेरी हर गलती को माफ़ किया
हर मुश्किल में मेरा साथ दिया।
यह जीवन तो है बहती नदिया
इसकी तेज धारा में तू नाव जैसी है।
माँ तेरी ममता तो कुछ ऐसी है।
तपती धूप में ठंडी छाँव जैसी है।
रचयिता
रश्मि यादव,
प्रधान शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय देवगनमऊ,
विकास खण्ड-सफीपुर,
जनपद-उन्नाव।

बहुत सुंदर कविता, शब्दों का उत्तम चयन..
ReplyDeleteThanku dear😊
ReplyDeleteVery nice poem ma'am
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