माँ की ममता

माँ के लिए क्या लिखूँ
माँ ने मुझे लिखा है
पर जब भी कागज़ पर
लिखा मैंने माँ का नाम
क़लम अदब से बोल उठी
सफल हो गए चारों धाम।
कौन कहता है माँ अपने
बच्चों के लिए रोती नहीं
हाँ ये सही बात है कि
वह कभी  दिखाती नहीं,
खुद न खाये पर अपने
बच्चों को कभी न
भूखा सुलातीं इसलिए
माँ, माँ होती है।
दवा असर ना करे तो
नज़रें उतारती है माँ
अपने बच्चों के लिए
आख़िरी साँस  तक
संघर्ष करती है माँ,
माँगने पर जहाँ पूरी
होती है मन्नत वहाँ तक
पैदल चली जाती है माँ,
इसलिए तो कहते हैं
जन्नत की मूरत होती है माँ
हर माँ तो माँ होती है नेक
पर नेक कहाँ होती है औलाद,
पूरी दुनिया जब साथ
छोड़ देती है, पर माँ न छोड़ेगी 
कभी तुम्हारा साथ
हे मेरे ईश्वर माँ को रखना
सदा सलामत
यही है दुवा यही है फरियाद।

रचयिता
सिम्मी सिंह,
सहायक अध्यापक, 
प्राथमिक विद्यालय-घईसरा,
विकास क्षेत्र-खजनी,
जिला-गोरखपुर।

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