माँ... तुझ पर क्या लिखूँ?
तुझ पर कितने गद्य लिखे
कवियों ने कितने काव्य लिखे,
ऐसा विशाल तेरा अस्तित्व
तुझपे कितने महाकाव्य लिखे।।
माँ.... आखिर मैं ऐसा क्या लिखूँ?
तेरे आँचल में पूरा आसमान आ जाए
तेरा गुणगान लिखने को धरती छोटी पड़ जाए,
इतना प्यार भरा दिल तेरा
जिसमें दुनिया भर का दुख दर्द समा जाए।
माँ... आखिर मैं ऐसा क्या लिखूँ?
बचपन में सुनी एक बात पुरानी
खुद ईश्वर के उपहार की कहानी।
बोले वो हर जगह तो हो नहीं सकते
इसलिए माँ को भेजा और बनाया जगजननी।।
माँ... जब ईश्वर तुझसे हार गया तो मैं कौन हूँ?
धरती से ज्यादा फैली ममता तेरी माँ
सागर से गहरा धीरज तेरा माँ
तू न हो तो दुनिया कैसी
यह दुनिया भी तो तूने जना माँ
माँ... क्या अब भी बाकी है तुझ पर कुछ लिखने को?
रचयिता
अंजली मिश्रा,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरा,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फतेहपुर।
कवियों ने कितने काव्य लिखे,
ऐसा विशाल तेरा अस्तित्व
तुझपे कितने महाकाव्य लिखे।।
माँ.... आखिर मैं ऐसा क्या लिखूँ?
तेरे आँचल में पूरा आसमान आ जाए
तेरा गुणगान लिखने को धरती छोटी पड़ जाए,
इतना प्यार भरा दिल तेरा
जिसमें दुनिया भर का दुख दर्द समा जाए।
माँ... आखिर मैं ऐसा क्या लिखूँ?
बचपन में सुनी एक बात पुरानी
खुद ईश्वर के उपहार की कहानी।
बोले वो हर जगह तो हो नहीं सकते
इसलिए माँ को भेजा और बनाया जगजननी।।
माँ... जब ईश्वर तुझसे हार गया तो मैं कौन हूँ?
धरती से ज्यादा फैली ममता तेरी माँ
सागर से गहरा धीरज तेरा माँ
तू न हो तो दुनिया कैसी
यह दुनिया भी तो तूने जना माँ
माँ... क्या अब भी बाकी है तुझ पर कुछ लिखने को?
रचयिता
अंजली मिश्रा,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरा,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

👌👌
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