दो प्यारे चूजे

  चिड़िया के दो प्यारे चूजे
  लगते हैं कुछ सूजे-सूजे।।

आँखें उनकी प्यारी-प्यारी।
लाल चोंच थी उनकी न्यारी।।

पिंक कलर के पंजों के बल।
बैठे हैं वो सँभल-सँभल कर।।

घास-फूस का बना बिछौना।
चिचियाते हैं छोना -मोना।।

कोमल पर हैं साज-सजीले।
धवल नयन हैं नीले-नीले।।

चिड़िया  माँ के खूब दुलारे।
  जैसे  नील-गगन  में  तारे।।

 दाना ले जब आती चिड़िया।
प्यार दिखा सहलाती चिड़िया।।

मित्र बना उनको दुलराती।
लाड़-लड़ाती सीख-सिखाती।।

 गर दाना तुम खाओगे।
नील गगन में हो आओगे।।

खाना-खाकर बढ़ते बच्चे।
चाहे हों फिर कितने कच्चे।।

इक दिन उनको मस्ती आई।
चिड़िया की मेहनत रंग लाई।।

नीलगगन में ली अंगड़ाई।
फुर्र उड़ गए दोनों भाई।।

तुम भी दूध पियो मेरे प्यारे।
हो जाओगे जग से न्यारे।।

रचयिता
प्रार्थना मिश्रा,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय नगला हरिकेशी,
विकास खण्ड-खंदौली,
जनपद-आगरा।

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