बुद्ध पूर्णिमा
पहले बुध्द के चरणों में, अपना शीश नवाऊँ मैं,
कहा जाता हैं एशिया के ज्योति पुँज, ये बात बताऊँ मैं।।
माया देवी (प्रजापति गौतमी) माता, पिता शुद्धोधन हैं, यह सभी ने जाना,
लुम्बिनी में जन्म धारा, नाम सिद्धार्थ सबने जाना।।
16 वर्ष में यशोधरा से विवाह हुआ, 26 वर्ष में गृह त्यागा,
हुई तपस्या पूरी जब, नाम महात्मा बुद्ध कहलाया।।
जन साधारण को पाली भाषा में उपदेश दिया,
बुद्ध ने त्रिरत्न बुद्ध, धम्म, संघ निर्माण किया।।
मानवता की ऐसी मिसाल जग को दिखलाया,
सत्य, अंहिसा, सदाचार अष्टांगिक मार्ग अपनाया।।
धन्य जीवन लोगों का किया,
स्वयं का दीपक बनो, ये ज्ञान दिया।।
आओं सब मिलकर बोले,
बुद्ध शरणं गच्छामि, धम्म शरणं गच्छामि, संघ शरणं गच्छामि।।
रचयिता
शालिनी सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय जानकीपुर,
विकास खण्ड-सिराथू,
जनपद-कौशाम्बी।
कहा जाता हैं एशिया के ज्योति पुँज, ये बात बताऊँ मैं।।
माया देवी (प्रजापति गौतमी) माता, पिता शुद्धोधन हैं, यह सभी ने जाना,
लुम्बिनी में जन्म धारा, नाम सिद्धार्थ सबने जाना।।
16 वर्ष में यशोधरा से विवाह हुआ, 26 वर्ष में गृह त्यागा,
हुई तपस्या पूरी जब, नाम महात्मा बुद्ध कहलाया।।
जन साधारण को पाली भाषा में उपदेश दिया,
बुद्ध ने त्रिरत्न बुद्ध, धम्म, संघ निर्माण किया।।
मानवता की ऐसी मिसाल जग को दिखलाया,
सत्य, अंहिसा, सदाचार अष्टांगिक मार्ग अपनाया।।
धन्य जीवन लोगों का किया,
स्वयं का दीपक बनो, ये ज्ञान दिया।।
आओं सब मिलकर बोले,
बुद्ध शरणं गच्छामि, धम्म शरणं गच्छामि, संघ शरणं गच्छामि।।
रचयिता
शालिनी सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय जानकीपुर,
विकास खण्ड-सिराथू,
जनपद-कौशाम्बी।

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