बालश्रम
कम उम्र के बच्चों से लिया गया श्रम,
आता है उस श्रेणी में जो कहलाता है बालश्रम।
खेती हो या हो कोई व्यापार, अन्य हो या हो कोई रिश्तेदार,
कम उम्र के बच्चों से न लो कोई काम, चाहे वह हो दुकान या हो घर-बार।
जिन हाथों में हो खिलौना और हो कलम-दवात,
उन नन्हें हाथों से ना करवाओ कोई काम।
ऐ मानुष; तू क्यों अपने बच्चों का जीवन करता है बर्बाद,
ऐसा तू कौन-सा काम करवा के हो जाता है आबाद।
हाँ कुछ बच्चे होते हैं काम करने को मजबूर,
क्योंकि उनके माँ-बाप उन्हें छोड़ चले जाते हैं बहुत दूर।
कुछ गरीब परिवार अपना घर चलाते हैं बच्चों की मजदूरी से,
कुछ परिवार ऐसे भी जिनके बच्चे काम करते हैं मजबूरी में।
बाप का साया नहीं हो सिर पर और माँ हो बीमार,
नहीं कमाने वाला कोई और हो खाने वाले चार।
फिर लोग उन बच्चों का उठा फायदा करते खूब अत्याचार,
एक तरफ उनका बचपन छीना और तार-तार हुआ उनका अधिकार।
चौदह साल से कम उम्र के बच्चों से काम लेना है कानूनी अपराध,
बालश्रम करवाने वालों को सजा होगी दो साल।
जिन्दगी का एक खूबसूरत सफर होता है बचपन,
बच्चों से काम करवाके मत छीनो उनका बचपन।
खेलकूद की उम्र में क्यों राह काम की पकड़ाई,
ऐ मानुष; बालश्रमिक बनाकर कौन सा करवाता है कमाई।
ऐ प्यारे बच्चों; काम बाद में पहले करो पढ़ाई,
पढ़ने -लिखने वालों ने, खूद अपनी किस्मत चमकाई।
रचयिता
शिराज़ अहमद,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय ददरा,
विकास खण्ड-मड़ियाहूं,
जनपद-जौनपुर।
आता है उस श्रेणी में जो कहलाता है बालश्रम।
खेती हो या हो कोई व्यापार, अन्य हो या हो कोई रिश्तेदार,
कम उम्र के बच्चों से न लो कोई काम, चाहे वह हो दुकान या हो घर-बार।
जिन हाथों में हो खिलौना और हो कलम-दवात,
उन नन्हें हाथों से ना करवाओ कोई काम।
ऐ मानुष; तू क्यों अपने बच्चों का जीवन करता है बर्बाद,
ऐसा तू कौन-सा काम करवा के हो जाता है आबाद।
हाँ कुछ बच्चे होते हैं काम करने को मजबूर,
क्योंकि उनके माँ-बाप उन्हें छोड़ चले जाते हैं बहुत दूर।
कुछ गरीब परिवार अपना घर चलाते हैं बच्चों की मजदूरी से,
कुछ परिवार ऐसे भी जिनके बच्चे काम करते हैं मजबूरी में।
बाप का साया नहीं हो सिर पर और माँ हो बीमार,
नहीं कमाने वाला कोई और हो खाने वाले चार।
फिर लोग उन बच्चों का उठा फायदा करते खूब अत्याचार,
एक तरफ उनका बचपन छीना और तार-तार हुआ उनका अधिकार।
चौदह साल से कम उम्र के बच्चों से काम लेना है कानूनी अपराध,
बालश्रम करवाने वालों को सजा होगी दो साल।
जिन्दगी का एक खूबसूरत सफर होता है बचपन,
बच्चों से काम करवाके मत छीनो उनका बचपन।
खेलकूद की उम्र में क्यों राह काम की पकड़ाई,
ऐ मानुष; बालश्रमिक बनाकर कौन सा करवाता है कमाई।
ऐ प्यारे बच्चों; काम बाद में पहले करो पढ़ाई,
पढ़ने -लिखने वालों ने, खूद अपनी किस्मत चमकाई।
रचयिता
शिराज़ अहमद,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय ददरा,
विकास खण्ड-मड़ियाहूं,
जनपद-जौनपुर।

Yatharth chitran
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