नव परिवर्तन का आधार

आओ बच्चों तुम्हें पढ़ाऊँ
ज्ञान की बातें तुम्हें सिखाऊँ।

मिलकर हम सब बात करेंगे,
नई चीजों से मुलाकात करेंगे।

कैसे बनती है कहानी,
चर्चाएँ होंगी नई पुरानी।

कैसे बन जाता इतिहास,
मेहनत लगती क्या कुछ खास।

कहाँ से आकाश में आते बादल,
कैसे पानी बरसाते बादल।

नमक, चीनी हैं क्यों घुल जाते,
पत्थर क्यों साबुत रह जाते।

A, An, The का क्या है चक्कर,
इनमें चकराते क्यों अक्सर।

रटते बहुत हैं पर भूल जाते,
एक वर्ड पूछने को अकुलाते।

रटो नहीं, समझो-समझाओ,
लॉजिकल थिंकिंग को अपनाओ।

किताबों को अपना दोस्त बनाओ,
छिपे रहस्यों की खोज लगाओ।

सम्मानपूर्वक शिक्षकों के ढिक जाओ,
उनसे ज्ञान आशीष तुम पाओ।

बनो नव परिवर्तन का आधार,
तभी लगेगी नैया पार।

रचयिता
रीता गुप्ता,
सहायक अध्यापक, 
मॉडल प्राइमरी स्कूल बेहट नंबर-एक,
विकास क्षेत्र-साढोली कदीम,
जनपद-सहारनपुर।

Comments

  1. Behtareen rachna he mam....keep going

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  2. Beautiful and very necessary for our children

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  3. Suprb Di👌👌👌
    Kha se lati ho aap ye imeginasn nd shabd
    👏👏👏👏👏

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  4. Bahut hi achha likha aapne mam

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  5. बहुत बढ़िया।
    बच्चों में जिज्ञासा जाग्रत करने वाली कविता।

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