तू ही है माँ
जब आँसू मेरा एक गिरा,
सौ जिसके गिरे,
वो तू है माँ!!
हर एक निवाला याद है
चोटी की गूँथ याद है
डाँट तेरी और हँसी मेरी
फिर मंद-मंद मुस्कान तेरी
मुझ संग इस मधुर दृश्य का प्रमाण जो दे पाए...
वो तू है माँ
वो तू है माँ.....
क्या बात है तेरे हाथों में
कुछ जादू सा है खाने में
यह नमक-मिर्च का तालमेल
चूल्हे-चौके का अजब खेल
खेल में पारंगत जो कहलाये
वो तू है माँ
वो तू है माँ...
हर उलझन में मेरी जो, खुद को भी उलझाए
नींद-चैन सब त्याग, उलझन सुलझाकर दिखलाये
रात रात भर जागकर, भोर भरे उठ जाए
भोर से लेकर, सांझ ढले तक थककर भी मुस्काये
वो तू है माँ
वो तू है माँ...
अब मैं भी थोड़ा बदल गयी
करनी शिकायतें भूल गयी
अब मैं भी तड़के उठती हूँ
कर्तव्यों को तत्पर रहती हूँ
पुत्री के इस जटिल परिवर्तन का स्रोत जो कहलाये
वो तू है माँ
वो तू है माँ...
माँ मैं प्रायः भावना को शब्द नहीं दे पाती
अनकहे इन शब्दों को समझा भी नहीं हूँ पाती
एक शोर मचे है स्वयं के भीतर
अस्तित्व बिखरता तितर-बितर
याद जिसे फिर करके बलिष्ठ पुनः बन जाऊँ
वो तू है माँ...
वो तू है माँ....
रचयिता
बुशरा सिद्दीकी,
सहायक अध्यापक विज्ञान,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय हृदयपुर,
विकास खण्ड व जनपद-हापुड़।
सौ जिसके गिरे,
वो तू है माँ!!
हर एक निवाला याद है
चोटी की गूँथ याद है
डाँट तेरी और हँसी मेरी
फिर मंद-मंद मुस्कान तेरी
मुझ संग इस मधुर दृश्य का प्रमाण जो दे पाए...
वो तू है माँ
वो तू है माँ.....
क्या बात है तेरे हाथों में
कुछ जादू सा है खाने में
यह नमक-मिर्च का तालमेल
चूल्हे-चौके का अजब खेल
खेल में पारंगत जो कहलाये
वो तू है माँ
वो तू है माँ...
हर उलझन में मेरी जो, खुद को भी उलझाए
नींद-चैन सब त्याग, उलझन सुलझाकर दिखलाये
रात रात भर जागकर, भोर भरे उठ जाए
भोर से लेकर, सांझ ढले तक थककर भी मुस्काये
वो तू है माँ
वो तू है माँ...
अब मैं भी थोड़ा बदल गयी
करनी शिकायतें भूल गयी
अब मैं भी तड़के उठती हूँ
कर्तव्यों को तत्पर रहती हूँ
पुत्री के इस जटिल परिवर्तन का स्रोत जो कहलाये
वो तू है माँ
वो तू है माँ...
माँ मैं प्रायः भावना को शब्द नहीं दे पाती
अनकहे इन शब्दों को समझा भी नहीं हूँ पाती
एक शोर मचे है स्वयं के भीतर
अस्तित्व बिखरता तितर-बितर
याद जिसे फिर करके बलिष्ठ पुनः बन जाऊँ
वो तू है माँ...
वो तू है माँ....
रचयिता
बुशरा सिद्दीकी,
सहायक अध्यापक विज्ञान,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय हृदयपुर,
विकास खण्ड व जनपद-हापुड़।

Awesome poetry dear
ReplyDeleteThank u😊
Deleteबहुत खूब,गज़ब 👏👏
ReplyDeleteThanks 🙏
Deleteबहुत खुब,गज़ब 👏👏
ReplyDeleteWonderful poetry...u are really awsome..keep going..achieve sky💐💐💐my best wishes to you for ur successful journey..stay blessed dear bushra..
ReplyDeleteShazia usmani
Incharge HM ups salehpur kotla
Block Hapur
Thank u shazia mam from bottom of my heart
Deleteमाँ को शब्दों में पिरोना जटिल कार्य है....परन्तु आपने कर दिखाया...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ....👍
ReplyDeleteAti sunder
ReplyDeleteWowww rising poetess... Long way to go girl.
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