बुद्ध पूर्णिमा
563 ईसा पूर्व,
वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि।
लेकर जन्म लुंबिनी में,
बने विश्व में महान विभूति।
जन्म निर्वाण व ज्ञान अशेष,
किया प्राप्त इस दिन विशेष।
बुद्ध दिवस, बैसक आदि नामों से,
मची धूम संसार में त्योहारों से।
सत्य खोज के लिये किये कठोर तप,
बोधिवृक्ष तले हुआ बुद्धत्व ज्ञान तब।
महापरिनिर्वाण स्थली है कुशीनगर,
इस दिन दीप जलाये जाते घर-घर।
संपूर्ण विश्व में पवित्र ज्ञान,
देकर स्वयं बुद्ध बने महान।
हिंदू कहते विष्णु अवतार,
भवसागर से करो हमें पार।
बताकर जन्म भर के आर्यसत्य चार,
किया मानव मानवता का उद्धार।
मानवतावादी बौद्ध दर्शन से अपने,
बने विश्व में महापुरुष सिद्धार्थ अपने।
रचयिता
ज्योत्सना जोशी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय आवसीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय झलुवाजाला,
विकास खण्ड-कोटाबाग,
जनपद-नैनीताल।
वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि।
लेकर जन्म लुंबिनी में,
बने विश्व में महान विभूति।
जन्म निर्वाण व ज्ञान अशेष,
किया प्राप्त इस दिन विशेष।
बुद्ध दिवस, बैसक आदि नामों से,
मची धूम संसार में त्योहारों से।
सत्य खोज के लिये किये कठोर तप,
बोधिवृक्ष तले हुआ बुद्धत्व ज्ञान तब।
महापरिनिर्वाण स्थली है कुशीनगर,
इस दिन दीप जलाये जाते घर-घर।
संपूर्ण विश्व में पवित्र ज्ञान,
देकर स्वयं बुद्ध बने महान।
हिंदू कहते विष्णु अवतार,
भवसागर से करो हमें पार।
बताकर जन्म भर के आर्यसत्य चार,
किया मानव मानवता का उद्धार।
मानवतावादी बौद्ध दर्शन से अपने,
बने विश्व में महापुरुष सिद्धार्थ अपने।
रचयिता
ज्योत्सना जोशी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय आवसीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय झलुवाजाला,
विकास खण्ड-कोटाबाग,
जनपद-नैनीताल।

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