परिवार

एक से दो, दो से तीन और तीन से होता है चार,
माँ-बाप और  बच्चों से मिलकर बनता है एक परिवार।

प्रायः परिवार के होते हैं  दो मुख्य प्रकार,
एकल परिवार और दूसरा होता संयुक्त परिवार।

माँ-बाप और बेटा-बेटी कहलाते एकल परिवार,
दादा-दादी और चाचा-चाची मिलकर बनाते संयुक्त परिवार।

जिस परिवार में होते लोग कम, कहलाता वह सुखी परिवार,
छोटे परिवार में होते लोग कम, लेकिन खुशियाँ होती अपरम्पार।

मुसीबत की घड़ी में खड़ा होता है बनकर दीवार,
हमें उस घड़ी में हौंसला और हिम्मत देता है परिवार।

मुक़म्मल करता है इस जहां को यही परिवार,
इंसान की पहचान होता है यही परिवार।

माँ होती ममता की मूरत, बाप होता ज्ञान की खान,
भाई होता जान, तो बहन होती घर की मान।

बुरे हों लाख हम,  जान देता है हम पर परिवार,
ख़ामोशी में भी दर्द को  पहचान लेता है परिवार।

रचयिता
शिराज़ अहमद,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय ददरा,          
विकास खण्ड-मड़ियाहूं,
जनपद-जौनपुर।

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