बच्चे की अभिलाषा

मैडम जी स्कूल खुलवा दो
साहब जी को ये कहलवा दो
घर में रहना हमें न भाये
विद्यालय की याद सताये।

 नई ड्रेस पहननी है और
 नई क्लास में जाना है
नई-नई किताबें लेकर
बैग नया सजाना है।

स्कूल चलो अभियान चलाकर
 पूर्ण नामांकन करवाना है
 जो न समझ में आया पिछला
मिशन कोशिश भी तो चलाना है

मीटर भर हम दूर रहेंगे
मुँह पर मास्क लगाएँगे
बार-बार हाथों को धोकर
छोटों के भी धुलवाएँगे।

पढ़ लिखकर हमको वैज्ञानिक
सैनिक, डॉक्टर बनना है
स्वस्थ रहे हमारा देश
काम कुछ ऐसा करना है।

बड़े होकर हम सब बच्चे
दुनिया में जगमगाएँगे
हमें मिटाने वालों की
हम ईंट से ईंट बजाएँगे।

रचयिता
आरती रावत पुण्डीर,
प्रधानाध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय असिंगी,
विकास खण्ड-खिर्सू,
जनपद-पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।

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