विश्व साइकिल दिवस

घूमने का कहीं जब बने विचार?

तुरन्त हो जाते हैं हम सब,

मोटर साईकिल, गाड़ियों पर सवार।

होकर सवार जाते घूमने,

पर्वत की वादियों को चूमने।

घाटियों का भी लुत्फ उठाते हैं,

कुल्लू मनाली हम जाते हैं।

पर नहीं करते इस पर विचार,

पर्यावरण की रक्षा का,

सपना कैसे हो साकार?

धुआँ छोड़ती यह गाड़ियाँ,

प्रदूषण को हैं फैलाती,

फिर भी यह गाड़ियाँ ही,

हमको हैं क्यूँ भाती?

साइकिल चलाना छोड़ दिया,

मुँह उससे है मोड़ लिया।

साइकिल चले जब बहे पसीना,

स्वास्थ्य भी हमें मिले अपार,

फिर भी बेचारी रखी?

साइकिल है कहीं दरकिनार।

आओ उठा लें साइकिल,

कर लें हम उससे प्यार,

जिससे मिलेगा हमें

स्वस्थ जीवन का उपहार।।


रचयिता 

ब्रजेश सिंह,

सहायक  अध्यापक, 

प्राथमिक विद्यालय बीठना, 

विकास खण्ड-लोधा,

जनपद-अलीगढ़।



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