मातृ-पितृ दिवस

माँ और पिता दोनों पूजनीय हैं।

अपनी संतान के लिए ईश्वर हैं।।

माँ तेरा कोई विकल्प नहीं है।

पिता के स्थान जैसा कोई स्थान नहीं है।।

दोनों ही परिवार के लिए ईश्वर हैं।

मन्दिर में सजाने के लिए मूरत हैं।।

माँ ही तो संतान की प्रथम पाठशाला है।

उसके बिना न संसार में कोई रखवाला है।।

माँ है तो परिवार में उजाला है।

पिता है तो बच्चों को सहारा है।।

दोनों ही जन पूजनीय हैं इस जग में।

दोनों को सम्मानित करते सब युग से।।

बेटी हो या बेटा दोनों की मित्र है माँ।

पिता ही तो है संतान का पूरा जहान।।

आओ मिलकर प्रण करें आज हम सब।

माँ पिता को वंदन करें नित्य हम सब।।

न छोड़ना माँ और पिता को अकेला कभी।

इनसे ही तो हम सब संतान हैं बने।।

वृद्धाश्रम में इनको छोड़ आने से बड़ा पाप नहीं।

इनके चरण पकड़ो, इससे बड़ा धर्म न कोई।।


रचयिता
सीमा अग्रवाल,
सेवानिवृत्त सहायक अध्यापिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय हाफ़िज़पुर उबारपुर,
विकास क्षेत्र - हापुड़,
जनपद - हापुड़।

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