सूर्य और चंद्र ग्रहण

देखा है क्या तुमने बच्चों,

कभी दिन में अंधेरा छा जाता है;

रात में आकाश में कभी,

चाँद नज़र नहीं आता है।


सोचा है क्या तुमने कभी,

ऐसा क्यों होता है;

हर दिन तो सब ठीक ही रहता,

क्यों कभी-कभी ऐसा हो जाता है।


पृथ्वी काटे चक्कर सूरज के,

चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर मंडराए;

लेकिन ये तीनों,

एक-दूसरे के रास्ते में ना आएँ।


लेकिन कभी -2 बच्चों,

ऐसा हो जाता है;

पृथ्वी और सूरज के बीच,

चंद्रमा आ जाता है।


जब चंद्रमा  की परछाईं से,

सूरज थोड़ा या पूरा छुप जाता है;

बच्चों इस घटना को,

सूर्य ग्रहण कहा जाता है।


सूरज और चंद्रमा के बीच,

जब पृथ्वी आ जाती है;

सूरज की किरणें तब,

चंद्रमा तक न पहुँच पाती हैं।


पृथ्वी की छाया से,

जब चंद्रमा छुप जाता है;

बच्चों इस घटना को,

चंद्र ग्रहण कहा जाता है।


जब भी लगे ग्रहण,

इस बात का रखना ध्यान ज़रा;

नग्न आँखों से ना देखना इसको,

आँखों को करता ये नुकसान बड़ा।


ये घटनाएँ प्राकृतिक होती हैं,

इनसे डरने की नहीं कोई बात है;

अंधविश्वास से न जोड़ो इसको,

होता ना ये कोई श्राप है।


रचयिता

हिना सिद्दीकी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय कुंजलगढ़,
विकास खण्ड-कैंपियरगंज,
जनपद-गोरखपुर।

Comments

  1. बहुत ही खुबसूरत रचना आदरणीया सिद्दिकी मैम जी !!
    कविता के माध्यम से चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण के बारे में आपने बहुत ही सरल ढंग से वर्णन करने का प्रयास किया है जो काबिले तारीफ़ है । बच्चे बहुत ही बोधगम्य तरीके से इसे आत्मसात करने में सक्षम होंगे ।

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