आओ मिलकर उन्हें पढ़ाएँ

आओ मिलकर उन्हें पढ़ाएँ 

जो छुपा देश का हिस्सा है, 


आओ मिलकर उन्हें जगाएँ

सोता भारत का किस्सा है।


आओ मिलकर कर्म करें 

हम दायित्वों का वहन करें,


हम शिक्षक पालक राष्ट्र के 

देश के हित में सब धर्म करें।


आओ मिलकर उन्हें पढ़ाएँ

जिनके पढ़ने से भारत का 


भविष्य बहुत सँवर जाएगा, 

जिनके पढ़ने से इस देश में 


एक बड़ा परिवर्तन आएगा।

आओ मिलकर ...........


कीचड़ दलदल में रहने वाले 

नीरज पुष्प सम खिल जाएँगे,


जब शिक्षा का संचार हुआ तो 

विकास के पथ से जुड़ जाएँगे।


आओ मिलकर ...….........


अपने कर्तव्यों को शिक्षक जानें 

शिक्षा के मर्म को फिर पहचानें


सच्चाई से अपना  धर्म निभाएँ

निर्दोष बालक में ईश्वर को मानें।


आओ मिलकर उन्हें...............।।


रचयिता

अंजनी द्विवेदी(काव्या),

एआरपी,

विकास खण्ड-भलुअनी,

जनपद-देवरिया।



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