विश्व जनसंख्या दिवस

बढ़ती जनसंख्या पर रहो ना तुम मौन,

देश के जिम्मेदार नागरिक भूल गए तुम कौन?

बढ़ती जनसंख्या कर रही समस्याओं का आगाज,

अब तो कुछ उपाय करो रहो ना तुम मौन।


बेरोजगारी, भुखमरी की अजब कहानी है,

हमें हमारी सच्चाई से मुलाकात करानी है।

आर्थिक संकट बढ़ रहा अनदेखा ना करो,

अन्न, जल को तरसे बात सबने जानी है।


जंगल की कटाई से स्वच्छ वायु घट रही,

प्रदूषण बढ़ रहा जीवन नली कट रही।

वन्य जीवन खतरे में, हो रहे सितम,

निजात पाओ उनसे क्षमता कम हो रही।


जनसंख्या के बढ़ने पर अंकुश लगाना होगा,

छोटा परिवार, सुखी परिवार का संकल्प लाना होगा।

जन-जन तक यह अभियान हमें पहुँचाना है,

अंधविश्वास, अशिक्षा को जड़ से मिटाना होगा।


बढ़ती आबादी पर जो ना लगाया विराम,

पल भर में बिगड़ जाएँगे बनते हुए काम।

हरियाली का संदेश प्रसारित करना होगा,

इस बढ़ती समस्या पर लगाना है लगाम।


रचयिता
नम्रता श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बड़ेह स्योढ़ा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।

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