नव पंथ चलें
चलो चलें नव पंथ चलें।
जन मन के बन दीप जलें।
डरना क्या अंधियारे से,
हम भरे हुए उजियारे से।
दीप नेह के आज जलाने,
पथ पर उजली रेख बनाने।
सृजन सुखद से भाव पलें।
चलो चलें, नव पंथ चलें।
बेसिक का अब मान बढ़ेगा,
शिक्षक का सम्मान बढ़ेगा।
नयी क्रांति का बिगुल बजा है,
नवाचार का भाव सजा है।
सुरभित भावों के सुमन खिलें।
चलो चलें, नव पंथ चलें।
नव विचार अब शाश्वत हैं,
हो गये प्रबुद्ध सब जागृत हैं।
मिशन हमारा अद्भुत न्यारा,
लक्ष्य सुखद है हमको प्यारा।
मन में अनुपम दीप जलें।
चलो चलें, नव पंथ चलें।
एक एक मिल हुए अनेकों,
आओ सब तुम भी देखो।
विश्वासों की नयी डगर पर,
मंजिल पाना है चलकर।
सृजन नया हो साथ चलें,
चलो चलें, नव पंथ चलें।
रचयिता
सतीश चन्द्र "कौशिक"
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अकबापुर,
विकास क्षेत्र-पहला,
जनपद -सीतापुर।
जन मन के बन दीप जलें।
डरना क्या अंधियारे से,
हम भरे हुए उजियारे से।
दीप नेह के आज जलाने,
पथ पर उजली रेख बनाने।
सृजन सुखद से भाव पलें।
चलो चलें, नव पंथ चलें।
बेसिक का अब मान बढ़ेगा,
शिक्षक का सम्मान बढ़ेगा।
नयी क्रांति का बिगुल बजा है,
नवाचार का भाव सजा है।
सुरभित भावों के सुमन खिलें।
चलो चलें, नव पंथ चलें।
नव विचार अब शाश्वत हैं,
हो गये प्रबुद्ध सब जागृत हैं।
मिशन हमारा अद्भुत न्यारा,
लक्ष्य सुखद है हमको प्यारा।
मन में अनुपम दीप जलें।
चलो चलें, नव पंथ चलें।
एक एक मिल हुए अनेकों,
आओ सब तुम भी देखो।
विश्वासों की नयी डगर पर,
मंजिल पाना है चलकर।
सृजन नया हो साथ चलें,
चलो चलें, नव पंथ चलें।
रचयिता
सतीश चन्द्र "कौशिक"
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अकबापुर,
विकास क्षेत्र-पहला,
जनपद -सीतापुर।

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