श्रद्धांजलि

रो रही माँ भारती,
आँसू बहा रहा गगन।
फना हुए जो वतन पर
कैसे करें उनको नमन?

वे तो निभा रहे थे फर्ज,
भूलकर अपने घर-बार को।
क्या उतार पाएँगे हम ये कर्ज़?
सहारा देंगे उनके परिवार को?

जिस पत्नी का सुहाग गया,
क्या उसको समझा पाएँगे?
जिस माता का बेटा गया,
क्या उसके आँसू सुखा पाएँगे?

क्यों हम आतंकी से बात करें,
जब वह नित नया आघात करे?
कब तक चलेगा विधवा प्रलाप?
अब तो नई शुरुआत करें।

आरोप लगे ना अब कोई,
ना अब कोई भी निंदा हो।
हम कदम उठाएँ अब ऐसा,
एक भी आतंकी ना जिंदा हो।

लेकर शपथ शहादत की,
अब यह हुंकार लगानी है।
आतंकियों को दूध पिलाता जो,
उस देश की हस्ती मिटानी है।

वीर शहीदों को मेरा अश्रुपूरित भावपूर्ण नमन

रचयिता
रीता गुप्ता,
सहायक अध्यापक, 
मॉडल प्राइमरी स्कूल बेहट नंबर-एक,
विकास क्षेत्र-साढोली कदीम,
जनपद-सहारनपुर।

Comments

  1. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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