उमंग

कैसी आयी ऋतु ऐ देखो,
हर ओर छाई हरियाली।
बदरा गाए गीत यहाँ, पवन बजाए ताल,
वर्षा की बूँदों के संग-संग,  झूमे डाली- डाली।
मन डोल उठे ऐसे में, खुद पर रहे न काबू,
लगे जाते जो पंख कहीं तो , गगन को छूना चाहूँ।
इंद्रधनुषी रंग छाया नभ में, धरती का हो गया श्रृंगार,
मगन होकर उमंग लिए, झूम उठा सारा संसार।
कीट-पतंगे, बूढ़े औ बच्चे, हर कोई नाचे बन मतवाला,
बागों में भी गूँज रहा, कोयल का संगीत निराला।
जंगल में भी छाया मंगल, एक होकर सब साथ फुदक रहे,
नदियों की छम-छम सरगम में, धरती आकाश सब झूम रहे।
काश! बस में होता ये मेरे, इस पल को यहीं रोक लेती,
हर जीवन उमंग भर जाता, नहीं उदासी कहीं भी होती।

रचयिता
नमिता,
प्रभारी अध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय फत्तेपुर मोहारी,
विकास खण्ड-मछरेहटा,
जिला-सीतापुर।

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