अब्दुल कलाम जी को नमन

अ ब तक न हुआ है न होगा कोई
ब् स गया जो आँखों में तारा बनकर
दु लारा सपूत भारत माता का था वो
ल हरा दिया तिरंगा विश्व पटल पर
क हते हैं हम सब मिसाइल मैन जिनको
ला खों में एक पैदा कभी होता है ऐसा
म न तन धन किया अर्पण देश को
जी ना तो बस जीना है अब्दुल कलाम जैसा
को शिश करने वाला की कभी हार नही होती
न ाविक का बेटा भरता था हाथों में समंदर
म हिमा भारत की बिखेर दी  विश्व में
न म आँखों को चला गया छोड़कर

रचयिता
आनन्द मिश्रा, 
प्राथमिक विद्यालय तिगड़ा, 
विकास खण्ड-फखरपुर,
जनपद-बहराइच।

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