हे मिसाइल मैन तुझे सलाम

हे मिसाइल मैन तुझे सलाम
हे मिसाइल मैन तुझे सलाम।

तू साइंटिस्ट है, टीचर है, लर्नर है, राइटर भी।
योगी है, फकीर है, युवाओं का प्रणेता भी।।
             तुझे सलाम।।

जैनुलब्दीन के लाल, 15 अक्टूबर 1931को रामेश्वरम का नाम बढ़ाया।
अशिअम्मा भी धन्य हुई जिसकी कोख मे तू जन्म पाया।।
                तुझे सलाम।।

जिस उम्र मे बच्चे कन्चे खेला करते हैं, उस उम्र में पिता का हाथ बँटाया।
अखबार बेचकर भी विद्या माँ को गले लगाया।।
                 तुझे सलाम।।

प्राइमरी के टीचर सुब्रमण्यम अय्यर भी धन्य हुए।
पक्षी की संरचना को मिसाइल तक पहुँचाने वाले शिष्य मिले।।
                तुझे सलाम।।

1962 मे पहला  प्रक्षेपण यान एस एल वी 3 बनाया।
भारत को रोहिणी उपग्रह देकर अन्तर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य  बनाया।।
                तुझे सलाम।।

1985 मे त्रिशूल, पृथ्वी, अग्नि, आकाश, नाग मिसाइलें बनाया।
1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण से अमेरिका भी थर्राया।।
          तुझे सलाम।।

विक्रम साराभाई, सतीश धवन, ब्रह्म प्रकाश का सानिध्य मिला।
जिनसे सीखा और सिखाया ज्ञान का भण्डार मिला।।
             तुझे सलाम।।
पद्म भूषण, पद्म विभूषण, भारत रत्न देकर सरकार ने भी मान बढ़ाया।
दलगत के दलदल से उठकर सबने आपको राष्ट्रपति बनाया।।
              तुझे सलाम।।

'रहने योग्य ग्रह' पर व्याख्यान देते-देते भारत माँ का लाल सो गया।
शिलांग की धरती, अम्बर सब स्तब्ध सा हो गया।।
             तुझे सलाम।।

विजन 2020 के सपने को हम सब साकार बनायेंगे।
भारत माँ के गौरव के खातिर नया परिवर्तन लायेंगे।।

हे मिसाइल मैन तुझे सलाम।।

रचयिता
ब्रजेश कुमार द्विवेदी,
प्रधानध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय हृदयनगर,
जनपद-बलरामपुर।

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