विद्यालय-एक बगिया
विद्यालय हमारा एक छोटी सी बगिया है ...
हर बच्चा और बच्ची उसकी फूल और कलियाँ हैं..
हमें अपनी बगिया को ज्ञान की खुशबू से महकाना है ...
उसे प्यार और मेहनत से सजाना है ...
हर बच्चे के मन में यही विश्वास जगाना है ...
उसके होठों पर यही तराना लाना है ...
"आज आसमां को मुझे भी छू लेने दो,
खुली हवा मे खुशबू मुझे भी बिखेर लेने दो,
अपने सपनों में मुझे भी रंग भर लेने दो,
मिलेगी मंजिल मुझे भी अपनी,
कदम मुझे भी आगे अपने बढ़ाने दो "………
रचयिता
वन्दना गुप्ता,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय विशेषरपुर,
विकास क्षेत्र-भदपुरा,
जनपद-बरेली।
हर बच्चा और बच्ची उसकी फूल और कलियाँ हैं..
हमें अपनी बगिया को ज्ञान की खुशबू से महकाना है ...
उसे प्यार और मेहनत से सजाना है ...
हर बच्चे के मन में यही विश्वास जगाना है ...
उसके होठों पर यही तराना लाना है ...
"आज आसमां को मुझे भी छू लेने दो,
खुली हवा मे खुशबू मुझे भी बिखेर लेने दो,
अपने सपनों में मुझे भी रंग भर लेने दो,
मिलेगी मंजिल मुझे भी अपनी,
कदम मुझे भी आगे अपने बढ़ाने दो "………
रचयिता
वन्दना गुप्ता,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय विशेषरपुर,
विकास क्षेत्र-भदपुरा,
जनपद-बरेली।

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