बेटियाँ

 हमारी आपकी प्रतिरूप बेटियाँ।
लक्ष्मी व दुर्गा की रूप बेटियाँ।
भारत माँ की स्वरुप बेटियाँ।
देकर छाँव, स्वयं सहतीं धूप बेटियाँ।
निश्चल सी निष्पक्षता का साक्ष्य बेटियाँ।
सादगी व सरलता की मूर्त बेटियाँ।
कितना भी सहें कष्ट, नहीं बनती धूर्त बेटियाँ।
ईनाम है हर माँ को मिली फलस्वरुप बेटियाँ।
क्या कहें सच ही है, हर माँ की गुरूर बेटियाँ।।

रचयिता
आलेख शरन,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय जंगल तिनकोनिया नं.-३ (वनटांगिया), 
विकास खण्ड-चरगाँवा, 
जनपद-गोरखपुर।

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