कलाम तुम्हें नमन
कलाम तुम्हें नमन, कलाम तुम्हें नमन।
माँ भारती के लाल, नमन नमन नमन।
भारत की सेवा में था जीवन को लगाया।
हर कर्म से अपने, यश भारत का बढ़ाया।
भारत हो विश्वगुरु, यह मन में थी लगन।
नमन नमन नमन, कलाम तुम्हें नमन।
विज्ञान के द्वारा माँ की करेंगे सेवा।
यही सोचकर के फिर मिसाइल को बनाया।
उनकी 'अग्नि' की मार से थर्राता है गगन।
नमन नमन नमन, कलाम तुम्हें नमन।
शिक्षक के रूप में जग याद करे मुझको।
बच्चों से स्नेह का संदेश दिया जग को।
हो स्वाभिमान हम सबके कहे मेरा वचन।
नमन नमन नमन, कलाम तुम्हें नमन।
रचयिता
अनुज कुमार सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय सैंती,
विकास क्षेत्र-टड़ियावां
जनपद-हरदोई।
माँ भारती के लाल, नमन नमन नमन।
भारत की सेवा में था जीवन को लगाया।
हर कर्म से अपने, यश भारत का बढ़ाया।
भारत हो विश्वगुरु, यह मन में थी लगन।
नमन नमन नमन, कलाम तुम्हें नमन।
विज्ञान के द्वारा माँ की करेंगे सेवा।
यही सोचकर के फिर मिसाइल को बनाया।
उनकी 'अग्नि' की मार से थर्राता है गगन।
नमन नमन नमन, कलाम तुम्हें नमन।
शिक्षक के रूप में जग याद करे मुझको।
बच्चों से स्नेह का संदेश दिया जग को।
हो स्वाभिमान हम सबके कहे मेरा वचन।
नमन नमन नमन, कलाम तुम्हें नमन।
रचयिता
अनुज कुमार सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय सैंती,
विकास क्षेत्र-टड़ियावां
जनपद-हरदोई।

Superb
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