माँ
वसुंधरा सा धैर्य तुममें,
चाँद सी शीतल है तू।
नभ सा है विस्तृत हृदय,
प्रेम की मूरत है तू।।
अवगुण तेरे संकीर्ण हैं,
तू सद्गुणों की खान है।
क्रोध में आशीष है,
दंड में वरदान है।।
प्रेम के प्याले तेरे दृग,
होंठ सुबह की लालिमा।
कर्णप्रिय वाणी तेरी,
केशरात्रि की कालिमा।।
भक्ति की तू शक्ति,
काव्य की तू पंक्ति।
श्रद्धा की उत्पत्ति,
वात्सल्य की तू तृप्ति।।
मातृत्व की परिभाषा,
करुणा की आशा।
मेरे भाव की भाषा
मेरी माँ।।
रचयिता
शशि द्विवेदी,
सहायक अध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय छीतमपुर,
विकास खण्ड-चोलापुर,
जनपद-वाराणसी।
चाँद सी शीतल है तू।
नभ सा है विस्तृत हृदय,
प्रेम की मूरत है तू।।
अवगुण तेरे संकीर्ण हैं,
तू सद्गुणों की खान है।
क्रोध में आशीष है,
दंड में वरदान है।।
प्रेम के प्याले तेरे दृग,
होंठ सुबह की लालिमा।
कर्णप्रिय वाणी तेरी,
केशरात्रि की कालिमा।।
भक्ति की तू शक्ति,
काव्य की तू पंक्ति।
श्रद्धा की उत्पत्ति,
वात्सल्य की तू तृप्ति।।
मातृत्व की परिभाषा,
करुणा की आशा।
मेरे भाव की भाषा
मेरी माँ।।
रचयिता
शशि द्विवेदी,
सहायक अध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय छीतमपुर,
विकास खण्ड-चोलापुर,
जनपद-वाराणसी।

वाह!! बहुत ही गहराई है
ReplyDeleteDhanyavad
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