दोस्ती है अनमोल

दोस्ती है अनमोल,
जिसका न कोई मोल।

यही वो तोहफा,
मिले तो निहाल।
न मिले तो,
जिंदगी बेहाल।।

दोस्ती बिना जीना क्या,
दोस्ती बिना रौनक कहाँ?
दोस्त जो सुख दुःख बांटे,
हँसी के पीछे आँसू देखे।।

बचपन के दोस्त,
भुलाये नहीं भूलते।
जिनके बिना कभी,
न झूला झूलते।।

नटखट भरे वो दिन,
किसी की टाँग खींचे।
किसी को प्यार से सींचे,
वो बचपन के सखा।।

कहाँ गए वो दिन,
जब एक दूजे के बिना।
पल भी गंवारा न था,
कहाँ जाएँ ढूँढने वो दिन।।

जिंदगी की दौड़ में,
कहीं खो गए हो।
आओ लौट चलें बचपन में,
जहाँ कहीं भी हो।।

चलो फिर से जियें,
स्कूल से कॉलेज के दिन।
दुनिया से हो बेफिक्र,
बचपन के  वो दिन।।

दोस्ती है अनमोल,
जिसका न कोई मोल।

रचयिता
रीना सैनी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय गिदहा,
विकास खण्ड-सदर,
जनपद -महाराजगंज।

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