सावन आया
सावन आया सावन आया, बादल फिर से छाएँगे,
फूल खिलेंगे डालों पर, झूले फिर पड़ जाएँगे,
रंग बिरंगे फूलों पर, भौंरे फिर से गाएँगे,
घुमड़-घुमड़ के बदरा भी, अपना रंग जमाएँगे,
कड़क कड़क के बिजली भी, बच्चों को डराएगी,
रपट पड़ेंगे बच्चे फिर से, अंगने में फिसलन हो जाएगी।
छप-छप करेंगे पानी में बच्चे, मेंढक टर टर गाएँगे,
ढोल बजेगा भंगड़ा होगा, मिलकर मौज मनाएँगे।
रंग बिरंगे इंद्र धनुष, बदरा बिच खिल जाएँगे,
कहीं खिलेगी धूप मगर, कहीं काली घटा छा जाएगी,
आँख मिचौली खेलेगा सूरज, बच्चे-बड़े सब मुस्काएँगे,
प्यारे बच्चे अच्छे बच्चे, छाता तान के आएँगे,
करें शरारत बच्चे जब, बड़ों के दिल भी ललचाएँगे,
भीग-भीग के अंगना में, छप छप दौड़ लगाएँगे,
डाँट पड़ेगी मम्मी से, फिर भी बाज न आएँगे,
बस थोड़ा और बस थोड़ा कहके, दिन भर भीगे जाएँगे ।
लेट उठेंगे बिस्तर से, फिर बारिश का बहाना बनाएँगे,
मम्मी देखो बारिश होगी, स्कूल नहीं हम जाएँगे,
गिर पड़े कहीं फिसल के अगर तो, कपड़े गीले हो जाएँगे,
यार दोस्त सब बच्चे बूढ़े, मिलकर हँसी उड़ाएँगे।
सावन आया सावन आया, बदरा फिर से छाएँगे,
फूल खिलेंगे रंग बिरंगे, झूले फिर पड़ जाएँगे।
तितली भौंरे मिलकर सब, फूलों पर मंडराएँगे,
प्यारे बच्चे अच्छे बच्चे, मिलकर मौज मनाएँगे।
रचयिता
नियाज़ मीर,
इंचार्ज प्रधानधयापक,
प्राथमिक विद्यालय कचैड़ा वारसाबाद-2
वविकास खण्ड-बिसरख,
जनपद-गौतम बुद्ध नगर।
फूल खिलेंगे डालों पर, झूले फिर पड़ जाएँगे,
रंग बिरंगे फूलों पर, भौंरे फिर से गाएँगे,
घुमड़-घुमड़ के बदरा भी, अपना रंग जमाएँगे,
कड़क कड़क के बिजली भी, बच्चों को डराएगी,
रपट पड़ेंगे बच्चे फिर से, अंगने में फिसलन हो जाएगी।
छप-छप करेंगे पानी में बच्चे, मेंढक टर टर गाएँगे,
ढोल बजेगा भंगड़ा होगा, मिलकर मौज मनाएँगे।
रंग बिरंगे इंद्र धनुष, बदरा बिच खिल जाएँगे,
कहीं खिलेगी धूप मगर, कहीं काली घटा छा जाएगी,
आँख मिचौली खेलेगा सूरज, बच्चे-बड़े सब मुस्काएँगे,
प्यारे बच्चे अच्छे बच्चे, छाता तान के आएँगे,
करें शरारत बच्चे जब, बड़ों के दिल भी ललचाएँगे,
भीग-भीग के अंगना में, छप छप दौड़ लगाएँगे,
डाँट पड़ेगी मम्मी से, फिर भी बाज न आएँगे,
बस थोड़ा और बस थोड़ा कहके, दिन भर भीगे जाएँगे ।
लेट उठेंगे बिस्तर से, फिर बारिश का बहाना बनाएँगे,
मम्मी देखो बारिश होगी, स्कूल नहीं हम जाएँगे,
गिर पड़े कहीं फिसल के अगर तो, कपड़े गीले हो जाएँगे,
यार दोस्त सब बच्चे बूढ़े, मिलकर हँसी उड़ाएँगे।
सावन आया सावन आया, बदरा फिर से छाएँगे,
फूल खिलेंगे रंग बिरंगे, झूले फिर पड़ जाएँगे।
तितली भौंरे मिलकर सब, फूलों पर मंडराएँगे,
प्यारे बच्चे अच्छे बच्चे, मिलकर मौज मनाएँगे।
रचयिता
नियाज़ मीर,
इंचार्ज प्रधानधयापक,
प्राथमिक विद्यालय कचैड़ा वारसाबाद-2
वविकास खण्ड-बिसरख,
जनपद-गौतम बुद्ध नगर।

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